बीबीसी, हिंदी सेंट्रल इंडिया के श्री विष्णुकांत तिवारी को रामनाथ गोयनका अवार्ड

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बीबीसी, हिंदी, सेंट्रल इंडिया के श्री विष्णुकांत तिवारी को रामनाथ गोयनका अवार्ड से सम्‍मानित किया।

विष्णुकांत तिवारी (MAMC 2020-22)

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के अमवा कोठार गांव से आने वाले श्री विष्णुकांत तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए लगातार दूसरी बार “रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया।

1999 में जन्मे विष्णुकांत तिवारी ने अपनी स्कूली शिक्षा जबलपुर, विशाखापट्टनम और रायपुर में पूरी की. बाद में उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की।

परिवार की तीन पीढ़ियों के सेना में कार्यरत होने के कारण इनकी पहली पसन्द भी सेना में जाना ही था. लेकिन किस्मत उन्हें पत्रकारिता में ले आई। इनकी पत्रकारिता की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान हुई, जब उन्होंने स्वतंत्र पत्रकार के रूप में ग्राउंड रिपोर्ट करना शुरू किया. शुरुआती दिनों में छत्तीसगढ़ के जनजातीय इलाकों से जुड़ी कहानियों पर काम करने के बाद ये महज 22 साल की उम्र में द क्विंट के मध्यप्रदेश – छत्तीसगढ़ संवाददाता नियुक्त हुए।

द क्विंट के साथ अपने कार्यकाल के दौरान विष्णुकांत ने आदिवासी समाज, नक्सलवाद, जातीय भेदभाव, सामाजिक कुरीतियों और ग्रामीण भारत के संघर्षों को केंद्र में रखकर कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स तैयार कीं।

द क्विंट के लिए की गई उनकी शुरुआती डॉक्यूमेंट्री में से एक “बस्तर के आदिवासी सुरक्षाबलों का विरोध क्यों करते हैं” के लिए साल 2024 में उन्हें रामनाथ गोयनका सम्मान से नवाज़ा गया।

साल 2022 में मध्य प्रदेश के खरगोन दंगों पर तटस्थ रिपोर्टिंग के बाद इन्हें व्यापक पहचान मिली।

2023 में इन्होंने झारखंड में “डायन” प्रथा के कारण महिलाओं पर होने वाली हिंसा और उनकी हत्याओं पर एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज बनाई। तीन हिस्सों की इस डॉक्यूमेंट्री के लिए उन्हें 2025 में दूसरी बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार मिला।

वर्तमान में विष्णुकांत बीबीसी हिंदी के सेंट्रल इंडिया संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत भारत के मध्य क्षेत्र के जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों के मुद्दों, जातीय राजनीति और सामाजिक संघर्षों पर रहता है।

कम समय में अपनी सटीक और गहन रिपोर्टिंग के कारण विष्णुकांत तिवारी ने पत्रकारिता जगत में एक अलग पहचान बनाई है। उनकी कोशिश रहती है कि वे हाशिए पर खड़े समुदायों की कहानियों को प्रमुखता से सामने ला सकें।